’सोपा’ उपाय ??

’फुकट ते पौष्टिक’ च्या ’पिपा’सेला आळा घालणारा ’सोपा’ उपाय.

कथा - कारखान्यातले भूत

भुतांच्या अस्तित्व शोधण्याचा प्रयत्न करणार्‍या मुलाची कथा

मैं गीत क्यूँ गाऊँ ?








गिद्धों के झुण्ड आते हैं


जीवित देह नोंच चले जाते हैं


आँखे बंद कर हम जी लेते हैं


एक पत्थर भी ना उठा पाऊँ


मैं गीत क्यूँ गाऊँ ?






क्रुद्ध पवन रोज बहता हैं


बेघर करता हैं, तन जलाता हैं


ना ये मन हमारा व्यथित होता हैं


एक नीड़ भी ना बना पाऊँ


मैं गीत क्यूँ गाऊँ ?






तिमिर यहाँ प्रतिपल होता हैं


सूर्य पर विकट हँसता हैं


हम भी तिमिर के साथ हो लेते हैं


एक दीपक भी ना जला पाऊँ


मैं गीत क्यूँ गाऊँ?






बेरंग जगत के रंगरेज़ लोग


मुखौटा पहने चालबाज़ लोग


एक मुखौटा मैं भी पहना हूँ


यह भी तो ना उतार पाऊँ


मैं गीत क्यूँ गाऊँ ?






खौफ़ के साये में रोज जीते लोग


घर लौटे तो दीवाली मनाते लोग


आज थोडा हँस के जी लेता हूँ


क्या पता कल घर आ ना पाऊँ


मैं गीत क्यूँ गाऊँ?






---- पुणे - ०३-०३-११ , बंगलोर - ०१-०५-११ ; १४-०७-११

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