पोस्ट्स

swami sanketanand लेबलसह पोस्ट दाखवत आहे

स्वामींचे अभंग-२

पाशवी पाशात। अडकला पक्षी। लालेलाल नक्षी। भूमीवर।।१।। किती तडफडे। किती कळवळे। तरी नच फळे। यत्न त्याचे।।२।। करी धडपड। सुटण्याची किती। परी झोळी रीती। राही त्याची।।३।। युगानुयुगांची। विफल साधना। विसरे यातना। अखेरीस।।४।। पाशवी पाशाच्या। प्रेमात पडला। पक्षी अडकला। कायमचा।।५।। बदलला सूर। राहून पाशात। आता गाई गीत। बंधनांचे।।६।। स्वामी म्हणे पाश। कसा सोडवावा। कसा मुक्त व्हावा। पक्षी देवा।।७।। -स्वामी संकेतानंद