गज़ल- 'आप'

आप यह जो हंगामा खड़ा करते हैं
ठीक है, पर क्यों अक्सर बड़ा करते हैं ?

वह बड़े भी बच्चे ही कहलाते हैं
बारहा ज़िद पे अपनी अड़ा करते हैं

आम संभलके रख टोकरीयों में तू
इक सड़ा निकले,सारे सड़ा करते हैं

आप को रहना होगा सलीके से अब
क्योंकि हंगामा हम भी खड़ा करते हैं

आप को वह फुर्ती से गिरा सकते हैं
आप को जो फुर्ती से खड़ा करते हैं

--- संकेत,
०३ जनवरी, २०१४,
नई दिल्ली 

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