रजनीकांतची आरती - हिंदी

आकाशने रजनीकांतच्या आरतीची मागणी केली..निमित्त होते रजनीकांत बसवण्याचे.. जसे आपण गणपती बसवतो ना तसेच रजनीकांत बसवायचा.  आरती मराठीत लिहिणार होतो मात्र एका मैत्रिणीसोबत चाललेल्या chat दरम्यान तिला हि कल्पना सांगितली आणि तत्क्षणी  अगदी सहजपणे आरतीचे धृपद सुचले, ती हिंदी असल्याने आरतीपण हिंदीमध्येच लिहायला घेतली. तिला धृपद आवडले  आणि मग  मी आरती पूर्ण करायला बसलो.
 आकाशराव सुद्धा प्रकट झालेत आणि त्यांच्या प्रोत्साहनाने १-१ कडवे लिहित गेलो. अवघ्या १० मिनिटांत संपूर्ण आरती तयार झाली.. आपण वाचून बघा आणि आपले मत कळवा.
आरती गाऊन झाल्यावर आपण जशी हाळी देतो ना उदा. "गणपती बाप्पा मोरया " तशी हाळी रजनीकांतच्या नावाने द्यायचे सुद्धा ठरले आणि लगेच एक हाळी सुचली.. ती हाळी अर्थातच आरतीनंतर .
मराठी आरतीसुद्धा लिहीली आहे.


जयदेव  जयदेव  जय  रजनीकांता |
गुंडों  का  तू  फोड़े  हैं  माथा .. जयदेव  जयदेव ||१ ||


दस  गुंडों  को  तुने  एक  ऊँगली  से  धो  डाला
गरीबो  की  ज्योति  और  जुल्मियो  की   ज्वाला
तेरे  जलवे  से  कोई  नहीं  बच  पाता ||२||
जयदेव  जयदेव.....
जयदेव  जयदेव जय  रजनीकांता..
जयदेव  जयदेव

तेरे  पैरोंमे   तूफानों  की  आहट..
तेरे  गोग्गल्स  में  स्टाइल  की  चाहत
लाचारों  का  तू  ही  जीवनदाता ||३||
जयदेव  जयदेव.....
जयदेव  जयदेव जय  रजनीकांता..
जयदेव  जयदेव

एक  गोलिमे  तुने  दो  गुन्ड़ोंको  मारा
तेरे  सामने  तो  यमराज  भी  हारा
तेरे  करिश्मे  और  कोई  न  कर  पाता ||४||
जयदेव  जयदेव.....
जयदेव  जयदेव जय  रजनीकांता..
जयदेव  जयदेव

सिगरेट  की  कांडी से  तुने  की  माया
५  फीट  उछालके  होंठोमे दबाया
सिगरेट  के  धुएं  से  हर  विलेन   मर  जाता ||५||
जयदेव  जयदेव....
जयदेव  जयदेव जय  रजनीकांता..
जयदेव  जयदेव

निशदिन   रजनीजी  मन  में  हैं  प्यारे ..
फ़िल्में  उनकी  हर  दुःख -दर्द  दूर  करें 
तन  रोमांचित  हो  जाता, मन  धुल  जाता ||६||
जयदेव  जयदेव.....
जयदेव  जयदेव जय  रजनीकांता..
जयदेव  जयदेव


जो  यह  करे  रजनीजी  की  पूजा
कहत  सकेतानंद  स्वामी ,
भजत  संकेतानंद  स्वामी
जीवन  धन्य  हो  जाता ...
जय जय जय रजनीकांता ||७||

जयदेव  जयदेव  जय  रजनीकांता
गुंडों  का  तू  फोड़े  हैं  माथा 
जयदेव  जयदेव ..

रजनीकांतच्या नावाने.....  MIND IT  अण्णा  !!!

तमिळप्रान्तस्वामी, सहस्रसूर्यप्रकाशित, कोटिहस्तबलाभुषित,सर्वयुद्धकलाविषारद, धुम्रदन्डिकाधारी, कृष्णनयनावरणउच्छालिता, अभिनयसम्राट, मनोरंजनदाता, भाग्यविधाता,तरुणातितरुण, चिरतरुण, देवाधिदेव, चित्रपटदेव, रजनिकांतदेवजीकी...... जय !!!!

१० टिप्पण्या:

  1. मस्त रे... आता एक संपुर्ण चातुर्मास प्रमाणे संपुर्ण रजनिसाल लिहायचा बेत आहे.

    प्रत्युत्तर द्याहटवा
  2. sahich re......aata hi link takate FB war majhya a/c la ani LAI BHARI war pan...........ajun jara jast lokana karu det njoy...........

    प्रत्युत्तर द्याहटवा
  3. @ सौरभ: रजनीकांतदेवांचे सगळे सण-वार लिहीले जाणार आहेत.

    प्रत्युत्तर द्याहटवा

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